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ईद का फ़रमान

ईद सिफृ 29 दिन रोज़े के बाद का दिन नही है बल्कि अललाह की राह मे बिताया
गया हर दिन ईद है।

रमजान मे रोजा न रखना, नमाज़ न पढ़ना, मकरूह और हराम कामो मे डूबे रहना मगर ईद पर नये कपड़े पहन लेना, फ़ित्रा कुफ़फ़ारा निकालना, दावतों पर आना जाना ईद नही है।

पाबन्दी से नमाज़ पढ़ना, कुरान की तिलावत करना, हराम और मकरूह करार दिए कामों से परहेज करना ही सही मायनों में ईद है छोटे-छोटे गुनाह जो हम हर दिन बेखयाली मे करते रहते हैं उन से बचना चाहिए जैसे कि बेकार में झूठ बोलना, दूसरों का हक मारना, पीठ पीछे बुराई करना इत्यादि।

अल्लाह हमें तौफीक और सेहत अता फरमाएं ताकि हम सारे साल अल्लाह की राह में हर दिन गुजारे आने वाले रमजान तक ताकि हम सही मायनों में ईद मना सके।

आमीन!

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